महाभारत के रचयिता वेदव्यास के अनुसार महाराज दुष्यन्त के पुत्र सम्राट भरत के नाम पर इस देश का नाम भारत पड़ा था। महाभारतकालीन भारत का फैलाव अत्यधिक विस्तृत माना गया है और यही वजह है कि इस देश को वृहत्तर भारत भी कहा जाता रहा है। आपने महाभारत में कई राज्यों और नगरों के बारे में पढ़ा होगा। लेकिन क्या आप जानते हैं, इस ग्रंथ में वर्णित कई राज्य और नगर आज भी अस्तित्व में हैं। महाभारत काल में अखंड भारत के मुख्यत: 16 महाजनपदों (कुरु, पंचाल, शूरसेन, वत्स, कोशल, मल्ल, काशी, अंग, मगध, वृज्जि, चेदि, मत्स्य, अश्मक, अवंति, गांधार और कंबोज) के अंतर्गत 200 से अधिक जनपद थे। दार्द, हूण, हुंजा, अम्बिस्ट आम्ब, पख्तू, कैकय, वाल्हीक बलख, अभिसार (राजौरी), कश्मीर, मद्र, यदु, तृसु, खांडव, सौवीर सौराष्ट्र, शल्य, यवन, किरात, निषाद, उशीनर, धनीप, कौशाम्बी, विदेही, अंग, प्राग्ज्योतिष (असम), घंग, मालव, कलिंग, कर्णाटक, पांडय, अनूप, विन्ध्य, मलय, द्रविड़, चोल, शिवि, बलूच क्षेत्र, सिंध का निचला क्षेत्र दंडक महाराष्ट्र सुरभिपट्टन मैसूर, आंध्र, सिंहल, आभीर , तंवर, शिना, काक, पणि, चुलूक चालुक्य, सरोस्ट सरोटे, कक्कड़, खोखर, चिन्धा चिन्धड़, समेरा, कोकन, जांगल, शक, पुण्ड्र, ओड्र, क्षुद्रक, योधेय जोहिया, शूर, तक्षक व लोहड़ लगभग 200 जनपद से अधिक जनपदों का महाभारत में उल्लेख मिलता है। महाभारत काल के प्राचीन शहर और गांव जो वर्तमान में भारत में मौजुद है, उनका वर्तमान नाम:- ▪️महाभारत काल में जिन नगर, शहर, गांव और जनपदों के जो नाम थे उनमें से वर्तमान में कुछ ही के नाम मिलते हैं। समय के साथ उन नामों में बदलाव होता गया। हालांकि बहुत से ऐसे शहर हैं जिन्हें आज भी उन्हीं नामों से पुकारा जाता है जिन नामों से महाभारत काल में पुकारा जाता था। जैसे मथुरा, काशी, जगन्नाथ, द्वारिका, बद्रीनाथ, गंगोत्री, सोमनाथ, कुरुक्षेत्र आदि। ये प्रमुख नगर : काशी, अवंतिका (उज्जयनी), हस्तिनापुर (मेरठ), बरनावत या व्याग्रपद (बागपत), वृंदावन, मथुरा,अयोध्या, द्वारिका, कांची, उज्जैन, इंद्रप्रस्थ और खांडवप्रस्थ (वर्तमान दिल्ली), पांचाल (हिमालय और चंबा नदी के बीच का स्थान), अंग प्रदेश (भागलपुर), मत्स्य प्रदेश की राजधानी विराट (वर्तमान में बैराठ राजस्थान के जयपुर जिले का एक शहर है), द्वारिका (गुजरात के समुद्र तट पर) आदि ऐसे कई शहर है जहां आज भी महाभारत काल के प्रमाण देखने को मिलते हैं। ◾कुरुक्षेत्र:- कुरुक्षेत्र को आज भी कुरुक्षेत्र ही कहा जाता है जो कि हरियाणा में स्थित है। कुरुक्षेत्र के पास अभिमन्युपुर था जिसे वर्तमान में अमीन के नाम से जानते हैं। कुरुक्षेत्र के पास ही जयंता नाम का एक क्षेत्र है जिसे वर्तमान में जींद कहा जाता है। जींद अब हरियाणा का एक जिला बन गया है। उसी तरह पानीप्रस्थ को पानीपत, सोनीप्रस्थ को सोनीपत और व्याग्रपत को बागपत कहते हैं। बागपत उत्तर प्रदेश का एक क्षेत्र है। हाल ही में यहां हुए उत्खनन में महाभारत काल के प्रचीन अवशेष पाए गए हैं। बागपत से 4 हजार वर्ष पुराना रथ मिला है। हस्तिनापुर आज यह स्थान मेरठ के पास है। गुरुग्राम जिसे मॉर्डन समय में गुड़गांव कहा गया। लेकिन अब ये एक बार फिर अपने प्राचीन नाम गुरुग्राम में जाना जाने लगा है। कुरुओं का क्षेत्र था मेरठ और थानेश्वर के आसपास था क्षेत्र और राजधानी थी पहले हस्तिनापुर और बाद में इन्द्रप्रस्थ। ◾ किष्किंधा:- अब के कर्णाटक को उस वक्त किष्किन्धा के नाम से जाना जाता था। ◾ वर्णावत:- हिंडनी (हिण्डन) और कृष्णा नदी के संगम पर बागपत जिले की सरधना तहसील में मेरठ (हस्तिनापुर) से लगभग 35 किलोमीटर की दूरी स्थित है। यह प्राचीन गांव 'वारणावत' या 'वारणावर्त' है, जो उन 5 ग्रामों में से था जिनकी मांग पांडवों ने दुर्योधन से महाभारत युद्ध के पूर्व की थी। ये 5 गांव वर्तमान नाम अनुसार निम्न थे- पानीपत, सोनीपत, बागपत, तिलपत और वरुपत (बरनावा)। बरनावा गांव में महाभारतकाल का लाक्षागृह टीला है। यहीं पर एक सुरंग भी है। यहां की सुरंग हिंडनी नदी के किनारे पर खुलती है। यहीं पर पांडव किला भी है जिसमें अनेक प्राचीन मूर्तियां देखी जा सकती हैं। गांव के दक्षिण में लगभग 100 फुट ऊंचा और 30 एकड़ भूमि पर फैला हुआ यह टीला लाक्षागृह का अवशेष है। इस टीले के नीचे 2 सुरंगें स्थित हैं। इस स्थान को आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया की निगरानी में रखा गया है। ◾ इंद्रप्रस्थ:- वर्तमान में दक्षिण दिल्ली के इस क्षेत्र का वर्णन महाभारत में इन्द्रप्रस्थ के रूप में है। कथा के अनुसार, इस स्थान पर एक वियावान जंगल था, जिसका नाम खांडव-वन था। पांडवों ने विश्वकर्मा की सहायता से यहां अपनी राजधानी बनाई थी। इन्द्रप्रस्थ नामक छोटा सा कस्बा यहां आज भी है। दिल्ली को उस काल में इंद्रप्रस्थ का जाता था और मेरठ को हस्तिनापुर। दिल्ली में पुराना किला इस बात का सबूत है। खुदाई में मिले अवशेषों के आधार पर पुरातत्वविदों का एक बड़ा वर्ग यह मानता है कि पांडवों कि राजधानी इसी स्थल पर थी। दिल्ली कई ऐतिहासिक घटनाओं का साक्षी रहा है। पुराना किला दिल्ली में यमुना नदी के पास स्थित है, जिसे पांडवों ने बनवाया था। बाद में इसका पुनरोद्धार होता रहा। महाभारत के अनुसार यह पांडवों की राजधानी थी। दूसरी ओर कुरु देश की राजधानी गंगा के किनारे हस्तिनापुर में स्थित थी। ◾पांचाल पांचाल के क्षेत्र में बरेली, बदायूं और फर्रूखाबाद आते थे; तब राजधानी अहिच्छत्र तथा काम्पिल्य थी। इसके नाम का सर्वप्रथम उल्लेख यजुर्वेद की तैत्तरीय संहिता में 'कंपिला' रूप में मिलता है। कनिंघम के अनुसार वर्तमान रुहेलखंड उत्तर पंचाल और दोआबा दक्षिण पंचाल था। पांचाल को पांच कुल के लोगों ने मिलकर बसाया था। यथा किवि, केशी, सृंजय, तुर्वसस और सोमक। पंचालों और कुरु जनपदों में परस्पर लड़ाई-झगड़े चलते रहते थे। ◾ केकय प्रदेश जम्मू-कश्मीर के उत्तरी भाग का उल्लेख महाभारत में केकय प्रदेश के रूप में है। केकय प्रदेश के राजा जयसेन का विवाह वसुदेव की बहन राधादेवी के साथ हुआ था। उनका पुत्र विन्द जरासंध, दुर्योधन का मित्र था। महाभारत के युद्ध में विन्द ने कौरवों का साथ दिया था। ◾मद्र देश केकय प्रदेश से ही सटा हुआ मद्र देश का भावार्थ जम्मू-कश्मीर से ही है। एतरेय ब्राह्मण के अनुसार, हिमालय के निकट होने के कारण मद्र देश को उत्तर कुरू भी कहा जाता था। महाभारत काल में मद्र देश के राजा शल्य थे, जिनकी बहन माद्री का विवाह राजा पाण्डु से हुआ था। नकुल और सहदेव माद्री के पुत्र थे। ◾ उज्जनक आज के नैनीताल की चर्चा महाभारत में उज्जनक के रूप में की गई है। गुरु द्रोणचार्य यहां पांडवों और कौरवों की अस्त्र-शस्त्र की शिक्षा देते थे। कुन्ती पुत्र भीम ने गुरु द्रोण के आदेश पर यहां एक शिवलिंग की स्थापना की थी। इस क्षेत्र को भीमशंकर के नाम से भी जाना जाता है। यहां शिव ज्योतिर्लिंग मंदिर है। ◾ शिवि देश महाभारत काल में दक्षिण पंजाब को शिवि देश कहा जाता था। महाभारत में महाराज उशीनर की चर्चा है, जिनके पौत्र शैव्य थे। शैव्य की पुत्री देविका का विवाह युधिष्ठिर से हुआ था। शैव्य एक महान धनुर्धारी थे और उन्होंने कुरुक्षेत्र के युद्ध में पांडवों का साथ दिया था। ◾वाणगंगा कुरुक्षेत्र से लगभग तीन किलोमीटर की दूरी पर स्थित है बाणगंगा। कहा जाता है कि महाभारत के भीषण युद्ध में घायल पितामह भीष्म को यहां बाण-सैय्या पर लिटाया गया था। महाभारत कथा के अनुसार भीष्मपितामह ने प्यास लगने पर जब जल माँगा तो अर्जुन ने अपने बाण से धरती पर प्रहार किया और गंगा की धारा फूट पड़ी। तभी से इस स्थान को वाणगंगा कहा जाता है। ◾हस्तिनापुर महाभारत में लिखित हस्तिनापुर आज के मेरठ के पास है। यह स्थान चन्द्रवंशी राजाओं की राजधानी थी। महाभारत युद्ध के बाद पांडवों ने हस्तिनापुर को अपने राज्य की राजधानी बनाया। ◾ पांचाल प्रदेश हिमालय की तराई क्षेत्र पांचाल प्रदेश के रूप में अंकित है। पांचाल के राजा द्रुपद थे, उनकी पुत्री द्रौपदी का विवाह पांच पांडव के साथ हुआ था। ◾ गोकुल यमुना नदी के किनारे बसा हुआ यह स्थान भी मथुरा से करीब 8 किलोमीटर दूर है। कंस से रक्षा के लिए कृष्ण के पिता वसुदेव ने उन्हें अपने मित्र नंदराय के घर गोकुल में छोड़ दिया था। ◾मथुरा यमुना नदी के किनारे बसा हुआ है। यहां राजा कंस के कारागार में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था। यहीं पर श्रीकृष्ण ने बाद में कंस का वध भी किया था। ◾अंग देश राजधानी चंपा। वर्तमान में बिहार के भागलपुर जिले के क्षेत्र का उल्लेख महाभारत में अंगदेश के रूप में है। दुर्योधन ने कर्ण को इस देश का राजा घोषित किया था। ◾कौशाम्बी प्रयाग (इलाहाबाद) और आसपास; राजधानी कौशांबी। कौशाम्बी वत्स देश की राजधानी थी। वर्तमान में प्रयागराज के निकट इस नगर के लोगों ने महाभारत के युद्ध में कौरवों का साथ दिया था। परीक्षित के पुत्र जनमेजय ने कौशाम्बी को अपनी राजधानी बनाया। ◾काशी महाभारत काल में काशी को शिक्षा का गढ़ माना जाता था। महाभारत की कथा के अनुसार, पितामह भीष्म काशी नरेश की पुत्रियों अम्बा, अम्बिका और अम्बालिका को जीत कर ले गए थे, ताकि उनका विवाह विचित्रवीर्य से कर सकें। यह वर्तमान में वाराणसी के नाम से भी जाना जाता है। ◾एकचक्रनगरी वर्तमान में बिहार का आरा जिला महाभारत काल में एकचक्रनगरी के रूप में जाना जाता था। लाक्षागृह के षडयंत्र से बचने के बाद पांडव कई दिनों तक एकचक्रनगरी में रहे थे। इस स्थान पर भीम ने बकासुर नामक एक राक्षस का अन्त किया था। ◾ मगध दक्षिण बिहार, राजधानी गिरिव्रज (आधुनिक राजगृह)। दक्षिण बिहार में उपस्थित मगध जरासंध की राजधानी थी। जरासंध की दो पुत्रियां अस्ती और प्राप्ति का विवाह कंस से हुआ था। ◾ पुन्डरू देश वर्तमान समय में बिहार के इस स्थान पर राजा पोन्ड्रक का राज था। पोन्ड्रक जरासंध का मित्र था और उसे लगता था कि वह कृष्ण है। उसने न केवल कृष्ण का वेश धारण किया था, बल्कि उसे वासुदेव और पुरुषोत्तम कहलवाना पसन्द था। ◾ प्रागज्योतिषपुर गुवाहाटी का उल्लेख महाभारत में प्रागज्योतिषपुर के रूप में किया गया है। महाभारत काल में यहां नरकासुर का राज था, जिसने 16 हजार कन्याओं को बन्दी बना रखा था। बाद में श्रीकृष्ण ने नरकासुर का वध किया और सभी 16 हजार कन्याओं को वहां से छुड़ाकर द्वारका लाए और सभी से विवाह किया। ◾ मणिपुर नगालैन्ड, असम, मिजोरम और वर्मा से घिरा हुआ मणिपुर महाभारत काल से भी पुराना है। मणिपुर के राजा चित्रवाहन की पुत्री चित्रांगदा का विवाह अर्जुन के साथ हुआ था। उससे एक पुत्र का जन्म हुआ, जिसका नाम था बभ्रुवाहन। राजा चित्रवाहन की मृत्यु के बाद बभ्रुवाहन को यहां का राजा बनाया गया। ◾ सिन्धु देश सिन्धु देश का तात्पर्य प्राचीन सिन्धु सभ्यता से है। यह स्थान न केवल अपनी कला और साहित्य के लिए प्रसिद्ध था, बल्कि वाणिज्य और व्यापार में भी यह अग्रणी था। यहां के राजा जयद्रथ का विवाह धृतराष्ट्र की पुत्री दुःश्शाला के साथ हुआ था। ◾ मत्स्य देश जयपुर; राजधानी विराट नगर। राजस्थान के उत्तरी इलाके का उल्लेख महाभारत में मत्स्य देश के रूप में है। इसकी राजधानी थी विराटनगरी। अज्ञातवास के दौरान पांडव वेश बदल कर राजा विराट के सेवक बन कर रहे थे। यहां राजा विराट के सेनापति और साले कीचक ने द्रौपदी पर बुरी नजर डाली थी। बाद में भीम ने उसकी हत्या कर दी। अर्जुन के पुत्र अभिमन्यू का विवाह राजा विराट की पुत्री उत्तरा के साथ हुआ था। ◾ पाटन महाभारत की कथा के अनुसार, गुजरात का पाटन द्वापर युग में एक प्रमुख वाणिज्यिक केन्द्र था। पाटन के निकट ही भीम ने हिडिम्ब नामक राक्षस का संहार किया था और उसकी बहन हिडिम्बा से विवाह किया। ◾ द्वारका माना जाता है कि गुजरात के पश्चिमी तट पर स्थित यह स्थान कालान्तर में समुन्दर में समा गया। यह कृष्ण की नगरी थी। ◾प्रभाष गुजरात के पश्चिमी तट पर स्थित इस स्थान के बारे में कहा जाता है कि यह स्थान भगवान श्रीकृष्ण का निवास-स्थान रहा है। महाभारत कथा के अनुसार, यहां भगवान श्रीकृष्ण पैर के अंगूठे में बाण लगने से मृत हो गए थे। उनके गोलोकवासी होने के बाद द्वारका नगरी समुन्दर में डूब गई। ◾ अवन्तिका वर्तमान में मालवा। राजधानी उज्जयनी मध्यप्रदेश के उज्जैन का उल्लेख महाभारत में अवन्तिका के रूप में मिलता है। यहां ऋषि सांदपनी का आश्रम था। अवन्तिका को देश के सात प्रमुख पवित्र नगरों में एक माना जाता है। यहां भगवान शिव के 12 ज्योर्तिलिंगों में एक महाकाल लिंग स्थापित है। ◾ चेदी राजधानी शुक्तिमती वर्तमान में ग्वालियर क्षेत्र को महाभारत काल में चेदी देश के रूप में जाना जाता था। गंगा व नर्मदा के मध्य स्थित चेदी महाभारत काल के संपन्न नगरों में से एक था। इस राज्य पर श्रीकृष्ण के फुफेरे भाई शिशुपाल का राज था। युधिष्ठिर के राजसूय यज्ञ के समय चेदी नरेश शिशुपाल को भी आमंत्रित किया गया था। शिशुपाल ने यहां कृष्ण को बुरा-भला कहा, तो कृष्ण ने सुदर्शन चक्र से उसका शीश काट दिया। ◾सोणितपुर मध्यप्रदेश के इटारसी को महाभारत काल में सोणितपुर के नाम से जाना जाता था। सोणितपुर पर वाणासुर का राज था। वाणासुर की पुत्री उषा का विवाह भगवान श्रीकृष्ण के पौत्र अनिरुद्ध के साथ सम्पन्न हुआ था। ◾ विदर्भ महाभारतकाल में विदर्भ क्षेत्र पर जरासंध के मित्र राजा भीष्मक का राज था। रुक्मिणी भीष्मक की पुत्री थीं। भगवान श्रीकृष्ण ने रुक्मिणी का अपहरण कर उनसे विवाह रचाया था। ◾ययातिपुर: उड़ीसा का वर्तमान क्षेत्र जाजपुर, महाभारत के समय में ययातिपुर के नाम से जाना जाता था। यह कटक, उड़ीसा के क्षेत्र में है। ◾विदेह उत्तर बिहार (मिथिला) क्षेत्र में 'विदेह' रहते थे और उनकी राजधानी 'मिथिला' थी। ◾कुंतला आंध्र के पश्चिम में 'कुंतला' का राज्य था जो आधुनिक दिन "उत्तर कन्नड़" और दक्षिण महाराष्ट्र क्षेत्र है। ◾अपरांत कुंतला के उत्तर-पश्चिम में गोवा था जो उस समय अपरांत के नाम से जाना जाता था। ◾तमिलकम कर्नाटक के दक्षिण में, तमिलकम के तीन देश हैं। द्रविड़ों का देश और उनकी राजधानी कांची। पांड्यों का देश और उनकी राजधानी मदुरा (मदुरै) चरम दक्षिण में। कावेरी के तट पर चोलों का देश। मालाबार तट में केरल का देश। महाभारत के कर्ण पर्व (12.15) में, तीनों राज्यों: पांड्य, केरल और चोल को "द्रविड़" के रूप में जोड़ा गया है। कठोर हाथी की तरह साहस के साथ लंबे और चौड़े छाती वाले योद्धाओं के रूप में वर्णित है।महाभारत के युद्ध में पांडव राजा पांडवों की तरफ से लड़े थे। ◾ओद्रस कलिंग के उत्तर में "ओद्रस" का देश था जो आज का "पश्चिमी ओडिशा" है। यह क्षेत्र महेंद्रगिरि पर्वत के लिए प्रसिद्ध था जो महाभारत और रामायण के अनुसार भगवान परशुराम का विश्राम स्थल था। इसकी राजधानी आज के केंद्रपाड़ा के पास मणिपुर थी। महाभारत का मणिपुर महेंद्रगिरि पर्वत (गजपति जिले / श्रीकाकुलम जिले में आंध्र-ओडिशा सीमा पर) के पास है। ◾कोशल : अवध; राजधानी साकेत और श्रावस्ती। ◾शूरसेन : मथुरा के आसपास का क्षेत्र; राजधानी मथुरा। ◾वज्जि : जिला दरभंगा और मुजफ्फरपुर; राजधानी मिथिला, जनकपुरी और वैशाली। ◾मल्ल : ज़िला देवरिया; राजधानी कुशीनगर और पावा (आधुनिक पडरौना) ◾अश्मक : गोदावरी घाटी; राजधानी पांडन्य। 👉महाभारत काल के प्राचीन राज्य जो वर्तमान में अलग देश है या दूसरे देश का हिस्सा है,उनका वर्तमान नाम:- ▪️जिन स्थानों के नाम आजकल काबुल, कंधार, बल्ख, वाखान, बगराम, पामीर, बदख्शां, पेशावर, स्वात, चारसद्दा आदि हैं, उन्हें महाभारत काल में क्रमश: कुंभा या कुहका, गंधार, बाल्हीक, वोक्काण, कपिशा, मेरू, कम्बोज, पुरुषपुर (पेशावर), सुवास्तु, पुष्कलावती आदि के नाम से जाना जाता था। ◾गांधार आज के कंधार को कभी गांधार के रूप में जाना जाता था। यह देश पाकिस्तान के रावलपिन्डी से लेकर सुदूर अफगानिस्तान तक फैला हुआ था। धृतराष्ट्र की पत्नी गांधारी वहां के राजा सुबल की पुत्री थीं। गांधारी के भाई शकुनी दुर्योधन के मामा थे। गांधार जनपद के क्षेत्र वर्तमान में अफगानिस्तान और पाकिस्तान के कुछ मिलकर हैं। गांधार की राजधानी तक्षशिला थी। आज के पाकिस्तान का पश्चिमी तथा अफगानिस्तान का पूर्वी क्षेत्र उस काल में भारत का गंधार प्रदेश था। पुरुषपुर (आधुनिक पेशावर) तथा तक्षशिला इसकी राजधानी थी। ◾तक्षशिला तक्षशिला गांधार देश की राजधानी थी। इसे वर्तमान में रावलपिन्डी कहा जाता है। तक्षशिला को ज्ञान और शिक्षा की नगरी भी कहा जाता था। ◾कंबोज कंबोज भी अफगान, पाकिस्तान और कश्मीर के कुछ क्षेत्रों को मिलाकर था। इसकी राजधानी राजपुर थी जिसे वर्तमान में राजौरी कहते हैं। यह भारतीय कश्मीर में स्थित है। पाकिस्तान का हजारा जिला भी कंबोज के अंतर्गत ही था। आधुनिक मान्यता के अनुसार कश्मीर के राजौरी से तजाकिस्तान तक का हिस्सा कंबोज था जिसमें आज का पामीर का पठार और बदख्शां भी हैं। उल्लेखनीय है कि कंबोज और कंबुज में फर्क है। प्राचीन कंबुज को वर्तमान में कंबोडिया कहते हैं। ◾ महाभारत काल में इरान को पारस्य देश कहते थे जहां पर अस्वाका (Aswaka) का साम्राज्य था। ◾इराक में पहलावा (Pahlava) का साम्राज्य था। ◾उत्तर मद्र और उत्तर कुरु को वर्तमान में किर्गिस्तान (Kyrgistan) कहते हैं। ◾नेपाल में विदेही साम्राज्य था जिसकी राजधानी मिथिला थी। ◾श्रीलंका में सिंहल और त्रिकुटा नामक दो राज्य थे। ◾महाभारत काल के परम कंबोज (Parama Kamboja) और हारा हूण (Hara Huna) वर्तमान में ताजाकिस्तान (Tajakistan) के अंतर्गत आते हैं। ◾तिब्बत को त्रिविष्टप कहा जाता था जहां रिशिका (Rishika) और तुशारा (Tushara) नामक राज्य थे। ◾ वंगा और पुण्ड्र के क्षेत्र को वर्तमान में बांग्लादेश कहा जाता है।ब्राह्मण नदी के उत्तर में उत्कल का देश था। पद्मा बेसिन में इसके उत्तर में "वंगा" का देश था, जो आज दक्षिणी बांग्लादेश का पद्मा डेल्टा है। ◾ म्यांमार ब्रह्मदेश था, जिसे बर्मा भी कहा जाता है। ◾ महाभारत काल में ग्रीस को यवन कहते थे। इसे वर्तमान में यूनान भी कहते हैं। कालयवन वहीं का था। इसी तरह सीरिया, असीरिया, सऊदी अरब, चीन आदि कई देशों का वर्णन मिलता है। महाभारत में सभा पर्व के दिग्विजय पर्व में युधिष्ठिर के राजसूय यज्ञ के बाद अर्जुन, भीम, नकुल और सहदेव द्वारा दिग्विजय यात्रा के दौरान विजित क्षेत्रों का काफी विस्तार से वर्णन किया गया है। इस पोस्ट में दिग्विजय का भौगौलिक मानचित्र भी साझा किया गया है।
महाभारत के रचयिता वेदव्यास के अनुसार महाराज दुष्यन्त के पुत्र सम्राट भरत के नाम पर इस देश का नाम भारत पड़ा था। महाभारतकालीन भारत का फैलाव अत्यधिक विस्तृत माना गया है और यही वजह है कि इस देश को वृहत्तर भारत भी कहा जाता रहा है। आपने महाभारत में कई राज्यों और नगरों के बारे में पढ़ा होगा। लेकिन क्या आप जानते हैं, इस ग्रंथ में वर्णित कई राज्य और नगर आज भी अस्तित्व में हैं। महाभारत काल में अखंड भारत के मुख्यत: 16 महाजनपदों (कुरु, पंचाल, शूरसेन, वत्स, कोशल, मल्ल, काशी, अंग, मगध, वृज्जि, चेदि, मत्स्य, अश्मक, अवंति, गांधार और कंबोज) के अंतर्गत 200 से अधिक जनपद थे। दार्द, हूण, हुंजा, अम्बिस्ट आम्ब, पख्तू, कैकय, वाल्हीक बलख, अभिसार (राजौरी), कश्मीर, मद्र, यदु, तृसु, खांडव, सौवीर सौराष्ट्र, शल्य, यवन, किरात, निषाद, उशीनर, धनीप, कौशाम्बी, विदेही, अंग, प्राग्ज्योतिष (असम), घंग, मालव, कलिंग, कर्णाटक, पांडय, अनूप, विन्ध्य, मलय, द्रविड़, चोल, शिवि, बलूच क्षेत्र, सिंध का निचला क्षेत्र दंडक महाराष्ट्र सुरभिपट्टन मैसूर, आंध्र, सिंहल, आभीर , तंवर, शिना, काक, पणि, चुलूक चालुक्य, सरोस्ट सरोटे, कक्कड़, खोखर, चिन्धा चिन्धड़, समेरा, कोकन, जांगल, शक, पुण्ड्र, ओड्र, क्षुद्रक, योधेय जोहिया, शूर, तक्षक व लोहड़ लगभग 200 जनपद से अधिक जनपदों का महाभारत में उल्लेख मिलता है। महाभारत काल के प्राचीन शहर और गांव जो वर्तमान में भारत में मौजुद है, उनका वर्तमान नाम:- ▪️महाभारत काल में जिन नगर, शहर, गांव और जनपदों के जो नाम थे उनमें से वर्तमान में कुछ ही के नाम मिलते हैं। समय के साथ उन नामों में बदलाव होता गया। हालांकि बहुत से ऐसे शहर हैं जिन्हें आज भी उन्हीं नामों से पुकारा जाता है जिन नामों से महाभारत काल में पुकारा जाता था। जैसे मथुरा, काशी, जगन्नाथ, द्वारिका, बद्रीनाथ, गंगोत्री, सोमनाथ, कुरुक्षेत्र आदि। ये प्रमुख नगर : काशी, अवंतिका (उज्जयनी), हस्तिनापुर (मेरठ), बरनावत या व्याग्रपद (बागपत), वृंदावन, मथुरा,अयोध्या, द्वारिका, कांची, उज्जैन, इंद्रप्रस्थ और खांडवप्रस्थ (वर्तमान दिल्ली), पांचाल (हिमालय और चंबा नदी के बीच का स्थान), अंग प्रदेश (भागलपुर), मत्स्य प्रदेश की राजधानी विराट (वर्तमान में बैराठ राजस्थान के जयपुर जिले का एक शहर है), द्वारिका (गुजरात के समुद्र तट पर) आदि ऐसे कई शहर है जहां आज भी महाभारत काल के प्रमाण देखने को मिलते हैं। ◾कुरुक्षेत्र:- कुरुक्षेत्र को आज भी कुरुक्षेत्र ही कहा जाता है जो कि हरियाणा में स्थित है। कुरुक्षेत्र के पास अभिमन्युपुर था जिसे वर्तमान में अमीन के नाम से जानते हैं। कुरुक्षेत्र के पास ही जयंता नाम का एक क्षेत्र है जिसे वर्तमान में जींद कहा जाता है। जींद अब हरियाणा का एक जिला बन गया है। उसी तरह पानीप्रस्थ को पानीपत, सोनीप्रस्थ को सोनीपत और व्याग्रपत को बागपत कहते हैं। बागपत उत्तर प्रदेश का एक क्षेत्र है। हाल ही में यहां हुए उत्खनन में महाभारत काल के प्रचीन अवशेष पाए गए हैं। बागपत से 4 हजार वर्ष पुराना रथ मिला है। हस्तिनापुर आज यह स्थान मेरठ के पास है। गुरुग्राम जिसे मॉर्डन समय में गुड़गांव कहा गया। लेकिन अब ये एक बार फिर अपने प्राचीन नाम गुरुग्राम में जाना जाने लगा है। कुरुओं का क्षेत्र था मेरठ और थानेश्वर के आसपास था क्षेत्र और राजधानी थी पहले हस्तिनापुर और बाद में इन्द्रप्रस्थ। ◾ किष्किंधा:- अब के कर्णाटक को उस वक्त किष्किन्धा के नाम से जाना जाता था। ◾ वर्णावत:- हिंडनी (हिण्डन) और कृष्णा नदी के संगम पर बागपत जिले की सरधना तहसील में मेरठ (हस्तिनापुर) से लगभग 35 किलोमीटर की दूरी स्थित है। यह प्राचीन गांव 'वारणावत' या 'वारणावर्त' है, जो उन 5 ग्रामों में से था जिनकी मांग पांडवों ने दुर्योधन से महाभारत युद्ध के पूर्व की थी। ये 5 गांव वर्तमान नाम अनुसार निम्न थे- पानीपत, सोनीपत, बागपत, तिलपत और वरुपत (बरनावा)। बरनावा गांव में महाभारतकाल का लाक्षागृह टीला है। यहीं पर एक सुरंग भी है। यहां की सुरंग हिंडनी नदी के किनारे पर खुलती है। यहीं पर पांडव किला भी है जिसमें अनेक प्राचीन मूर्तियां देखी जा सकती हैं। गांव के दक्षिण में लगभग 100 फुट ऊंचा और 30 एकड़ भूमि पर फैला हुआ यह टीला लाक्षागृह का अवशेष है। इस टीले के नीचे 2 सुरंगें स्थित हैं। इस स्थान को आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया की निगरानी में रखा गया है। ◾ इंद्रप्रस्थ:- वर्तमान में दक्षिण दिल्ली के इस क्षेत्र का वर्णन महाभारत में इन्द्रप्रस्थ के रूप में है। कथा के अनुसार, इस स्थान पर एक वियावान जंगल था, जिसका नाम खांडव-वन था। पांडवों ने विश्वकर्मा की सहायता से यहां अपनी राजधानी बनाई थी। इन्द्रप्रस्थ नामक छोटा सा कस्बा यहां आज भी है। दिल्ली को उस काल में इंद्रप्रस्थ का जाता था और मेरठ को हस्तिनापुर। दिल्ली में पुराना किला इस बात का सबूत है। खुदाई में मिले अवशेषों के आधार पर पुरातत्वविदों का एक बड़ा वर्ग यह मानता है कि पांडवों कि राजधानी इसी स्थल पर थी। दिल्ली कई ऐतिहासिक घटनाओं का साक्षी रहा है। पुराना किला दिल्ली में यमुना नदी के पास स्थित है, जिसे पांडवों ने बनवाया था। बाद में इसका पुनरोद्धार होता रहा। महाभारत के अनुसार यह पांडवों की राजधानी थी। दूसरी ओर कुरु देश की राजधानी गंगा के किनारे हस्तिनापुर में स्थित थी। ◾पांचाल पांचाल के क्षेत्र में बरेली, बदायूं और फर्रूखाबाद आते थे; तब राजधानी अहिच्छत्र तथा काम्पिल्य थी। इसके नाम का सर्वप्रथम उल्लेख यजुर्वेद की तैत्तरीय संहिता में 'कंपिला' रूप में मिलता है। कनिंघम के अनुसार वर्तमान रुहेलखंड उत्तर पंचाल और दोआबा दक्षिण पंचाल था। पांचाल को पांच कुल के लोगों ने मिलकर बसाया था। यथा किवि, केशी, सृंजय, तुर्वसस और सोमक। पंचालों और कुरु जनपदों में परस्पर लड़ाई-झगड़े चलते रहते थे। ◾ केकय प्रदेश जम्मू-कश्मीर के उत्तरी भाग का उल्लेख महाभारत में केकय प्रदेश के रूप में है। केकय प्रदेश के राजा जयसेन का विवाह वसुदेव की बहन राधादेवी के साथ हुआ था। उनका पुत्र विन्द जरासंध, दुर्योधन का मित्र था। महाभारत के युद्ध में विन्द ने कौरवों का साथ दिया था। ◾मद्र देश केकय प्रदेश से ही सटा हुआ मद्र देश का भावार्थ जम्मू-कश्मीर से ही है। एतरेय ब्राह्मण के अनुसार, हिमालय के निकट होने के कारण मद्र देश को उत्तर कुरू भी कहा जाता था। महाभारत काल में मद्र देश के राजा शल्य थे, जिनकी बहन माद्री का विवाह राजा पाण्डु से हुआ था। नकुल और सहदेव माद्री के पुत्र थे। ◾ उज्जनक आज के नैनीताल की चर्चा महाभारत में उज्जनक के रूप में की गई है। गुरु द्रोणचार्य यहां पांडवों और कौरवों की अस्त्र-शस्त्र की शिक्षा देते थे। कुन्ती पुत्र भीम ने गुरु द्रोण के आदेश पर यहां एक शिवलिंग की स्थापना की थी। इस क्षेत्र को भीमशंकर के नाम से भी जाना जाता है। यहां शिव ज्योतिर्लिंग मंदिर है। ◾ शिवि देश महाभारत काल में दक्षिण पंजाब को शिवि देश कहा जाता था। महाभारत में महाराज उशीनर की चर्चा है, जिनके पौत्र शैव्य थे। शैव्य की पुत्री देविका का विवाह युधिष्ठिर से हुआ था। शैव्य एक महान धनुर्धारी थे और उन्होंने कुरुक्षेत्र के युद्ध में पांडवों का साथ दिया था। ◾वाणगंगा कुरुक्षेत्र से लगभग तीन किलोमीटर की दूरी पर स्थित है बाणगंगा। कहा जाता है कि महाभारत के भीषण युद्ध में घायल पितामह भीष्म को यहां बाण-सैय्या पर लिटाया गया था। महाभारत कथा के अनुसार भीष्मपितामह ने प्यास लगने पर जब जल माँगा तो अर्जुन ने अपने बाण से धरती पर प्रहार किया और गंगा की धारा फूट पड़ी। तभी से इस स्थान को वाणगंगा कहा जाता है। ◾हस्तिनापुर महाभारत में लिखित हस्तिनापुर आज के मेरठ के पास है। यह स्थान चन्द्रवंशी राजाओं की राजधानी थी। महाभारत युद्ध के बाद पांडवों ने हस्तिनापुर को अपने राज्य की राजधानी बनाया। ◾ पांचाल प्रदेश हिमालय की तराई क्षेत्र पांचाल प्रदेश के रूप में अंकित है। पांचाल के राजा द्रुपद थे, उनकी पुत्री द्रौपदी का विवाह पांच पांडव के साथ हुआ था। ◾ गोकुल यमुना नदी के किनारे बसा हुआ यह स्थान भी मथुरा से करीब 8 किलोमीटर दूर है। कंस से रक्षा के लिए कृष्ण के पिता वसुदेव ने उन्हें अपने मित्र नंदराय के घर गोकुल में छोड़ दिया था। ◾मथुरा यमुना नदी के किनारे बसा हुआ है। यहां राजा कंस के कारागार में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था। यहीं पर श्रीकृष्ण ने बाद में कंस का वध भी किया था। ◾अंग देश राजधानी चंपा। वर्तमान में बिहार के भागलपुर जिले के क्षेत्र का उल्लेख महाभारत में अंगदेश के रूप में है। दुर्योधन ने कर्ण को इस देश का राजा घोषित किया था। ◾कौशाम्बी प्रयाग (इलाहाबाद) और आसपास; राजधानी कौशांबी। कौशाम्बी वत्स देश की राजधानी थी। वर्तमान में प्रयागराज के निकट इस नगर के लोगों ने महाभारत के युद्ध में कौरवों का साथ दिया था। परीक्षित के पुत्र जनमेजय ने कौशाम्बी को अपनी राजधानी बनाया। ◾काशी महाभारत काल में काशी को शिक्षा का गढ़ माना जाता था। महाभारत की कथा के अनुसार, पितामह भीष्म काशी नरेश की पुत्रियों अम्बा, अम्बिका और अम्बालिका को जीत कर ले गए थे, ताकि उनका विवाह विचित्रवीर्य से कर सकें। यह वर्तमान में वाराणसी के नाम से भी जाना जाता है। ◾एकचक्रनगरी वर्तमान में बिहार का आरा जिला महाभारत काल में एकचक्रनगरी के रूप में जाना जाता था। लाक्षागृह के षडयंत्र से बचने के बाद पांडव कई दिनों तक एकचक्रनगरी में रहे थे। इस स्थान पर भीम ने बकासुर नामक एक राक्षस का अन्त किया था। ◾ मगध दक्षिण बिहार, राजधानी गिरिव्रज (आधुनिक राजगृह)। दक्षिण बिहार में उपस्थित मगध जरासंध की राजधानी थी। जरासंध की दो पुत्रियां अस्ती और प्राप्ति का विवाह कंस से हुआ था। ◾ पुन्डरू देश वर्तमान समय में बिहार के इस स्थान पर राजा पोन्ड्रक का राज था। पोन्ड्रक जरासंध का मित्र था और उसे लगता था कि वह कृष्ण है। उसने न केवल कृष्ण का वेश धारण किया था, बल्कि उसे वासुदेव और पुरुषोत्तम कहलवाना पसन्द था। ◾ प्रागज्योतिषपुर गुवाहाटी का उल्लेख महाभारत में प्रागज्योतिषपुर के रूप में किया गया है। महाभारत काल में यहां नरकासुर का राज था, जिसने 16 हजार कन्याओं को बन्दी बना रखा था। बाद में श्रीकृष्ण ने नरकासुर का वध किया और सभी 16 हजार कन्याओं को वहां से छुड़ाकर द्वारका लाए और सभी से विवाह किया। ◾ मणिपुर नगालैन्ड, असम, मिजोरम और वर्मा से घिरा हुआ मणिपुर महाभारत काल से भी पुराना है। मणिपुर के राजा चित्रवाहन की पुत्री चित्रांगदा का विवाह अर्जुन के साथ हुआ था। उससे एक पुत्र का जन्म हुआ, जिसका नाम था बभ्रुवाहन। राजा चित्रवाहन की मृत्यु के बाद बभ्रुवाहन को यहां का राजा बनाया गया। ◾ सिन्धु देश सिन्धु देश का तात्पर्य प्राचीन सिन्धु सभ्यता से है। यह स्थान न केवल अपनी कला और साहित्य के लिए प्रसिद्ध था, बल्कि वाणिज्य और व्यापार में भी यह अग्रणी था। यहां के राजा जयद्रथ का विवाह धृतराष्ट्र की पुत्री दुःश्शाला के साथ हुआ था। ◾ मत्स्य देश जयपुर; राजधानी विराट नगर। राजस्थान के उत्तरी इलाके का उल्लेख महाभारत में मत्स्य देश के रूप में है। इसकी राजधानी थी विराटनगरी। अज्ञातवास के दौरान पांडव वेश बदल कर राजा विराट के सेवक बन कर रहे थे। यहां राजा विराट के सेनापति और साले कीचक ने द्रौपदी पर बुरी नजर डाली थी। बाद में भीम ने उसकी हत्या कर दी। अर्जुन के पुत्र अभिमन्यू का विवाह राजा विराट की पुत्री उत्तरा के साथ हुआ था। ◾ पाटन महाभारत की कथा के अनुसार, गुजरात का पाटन द्वापर युग में एक प्रमुख वाणिज्यिक केन्द्र था। पाटन के निकट ही भीम ने हिडिम्ब नामक राक्षस का संहार किया था और उसकी बहन हिडिम्बा से विवाह किया। ◾ द्वारका माना जाता है कि गुजरात के पश्चिमी तट पर स्थित यह स्थान कालान्तर में समुन्दर में समा गया। यह कृष्ण की नगरी थी। ◾प्रभाष गुजरात के पश्चिमी तट पर स्थित इस स्थान के बारे में कहा जाता है कि यह स्थान भगवान श्रीकृष्ण का निवास-स्थान रहा है। महाभारत कथा के अनुसार, यहां भगवान श्रीकृष्ण पैर के अंगूठे में बाण लगने से मृत हो गए थे। उनके गोलोकवासी होने के बाद द्वारका नगरी समुन्दर में डूब गई। ◾ अवन्तिका वर्तमान में मालवा। राजधानी उज्जयनी मध्यप्रदेश के उज्जैन का उल्लेख महाभारत में अवन्तिका के रूप में मिलता है। यहां ऋषि सांदपनी का आश्रम था। अवन्तिका को देश के सात प्रमुख पवित्र नगरों में एक माना जाता है। यहां भगवान शिव के 12 ज्योर्तिलिंगों में एक महाकाल लिंग स्थापित है। ◾ चेदी राजधानी शुक्तिमती वर्तमान में ग्वालियर क्षेत्र को महाभारत काल में चेदी देश के रूप में जाना जाता था। गंगा व नर्मदा के मध्य स्थित चेदी महाभारत काल के संपन्न नगरों में से एक था। इस राज्य पर श्रीकृष्ण के फुफेरे भाई शिशुपाल का राज था। युधिष्ठिर के राजसूय यज्ञ के समय चेदी नरेश शिशुपाल को भी आमंत्रित किया गया था। शिशुपाल ने यहां कृष्ण को बुरा-भला कहा, तो कृष्ण ने सुदर्शन चक्र से उसका शीश काट दिया। ◾सोणितपुर मध्यप्रदेश के इटारसी को महाभारत काल में सोणितपुर के नाम से जाना जाता था। सोणितपुर पर वाणासुर का राज था। वाणासुर की पुत्री उषा का विवाह भगवान श्रीकृष्ण के पौत्र अनिरुद्ध के साथ सम्पन्न हुआ था। ◾ विदर्भ महाभारतकाल में विदर्भ क्षेत्र पर जरासंध के मित्र राजा भीष्मक का राज था। रुक्मिणी भीष्मक की पुत्री थीं। भगवान श्रीकृष्ण ने रुक्मिणी का अपहरण कर उनसे विवाह रचाया था। ◾ययातिपुर: उड़ीसा का वर्तमान क्षेत्र जाजपुर, महाभारत के समय में ययातिपुर के नाम से जाना जाता था। यह कटक, उड़ीसा के क्षेत्र में है। ◾विदेह उत्तर बिहार (मिथिला) क्षेत्र में 'विदेह' रहते थे और उनकी राजधानी 'मिथिला' थी। ◾कुंतला आंध्र के पश्चिम में 'कुंतला' का राज्य था जो आधुनिक दिन "उत्तर कन्नड़" और दक्षिण महाराष्ट्र क्षेत्र है। ◾अपरांत कुंतला के उत्तर-पश्चिम में गोवा था जो उस समय अपरांत के नाम से जाना जाता था। ◾तमिलकम कर्नाटक के दक्षिण में, तमिलकम के तीन देश हैं। द्रविड़ों का देश और उनकी राजधानी कांची। पांड्यों का देश और उनकी राजधानी मदुरा (मदुरै) चरम दक्षिण में। कावेरी के तट पर चोलों का देश। मालाबार तट में केरल का देश। महाभारत के कर्ण पर्व (12.15) में, तीनों राज्यों: पांड्य, केरल और चोल को "द्रविड़" के रूप में जोड़ा गया है। कठोर हाथी की तरह साहस के साथ लंबे और चौड़े छाती वाले योद्धाओं के रूप में वर्णित है।महाभारत के युद्ध में पांडव राजा पांडवों की तरफ से लड़े थे। ◾ओद्रस कलिंग के उत्तर में "ओद्रस" का देश था जो आज का "पश्चिमी ओडिशा" है। यह क्षेत्र महेंद्रगिरि पर्वत के लिए प्रसिद्ध था जो महाभारत और रामायण के अनुसार भगवान परशुराम का विश्राम स्थल था। इसकी राजधानी आज के केंद्रपाड़ा के पास मणिपुर थी। महाभारत का मणिपुर महेंद्रगिरि पर्वत (गजपति जिले / श्रीकाकुलम जिले में आंध्र-ओडिशा सीमा पर) के पास है। ◾कोशल : अवध; राजधानी साकेत और श्रावस्ती। ◾शूरसेन : मथुरा के आसपास का क्षेत्र; राजधानी मथुरा। ◾वज्जि : जिला दरभंगा और मुजफ्फरपुर; राजधानी मिथिला, जनकपुरी और वैशाली। ◾मल्ल : ज़िला देवरिया; राजधानी कुशीनगर और पावा (आधुनिक पडरौना) ◾अश्मक : गोदावरी घाटी; राजधानी पांडन्य। 👉महाभारत काल के प्राचीन राज्य जो वर्तमान में अलग देश है या दूसरे देश का हिस्सा है,उनका वर्तमान नाम:- ▪️जिन स्थानों के नाम आजकल काबुल, कंधार, बल्ख, वाखान, बगराम, पामीर, बदख्शां, पेशावर, स्वात, चारसद्दा आदि हैं, उन्हें महाभारत काल में क्रमश: कुंभा या कुहका, गंधार, बाल्हीक, वोक्काण, कपिशा, मेरू, कम्बोज, पुरुषपुर (पेशावर), सुवास्तु, पुष्कलावती आदि के नाम से जाना जाता था। ◾गांधार आज के कंधार को कभी गांधार के रूप में जाना जाता था। यह देश पाकिस्तान के रावलपिन्डी से लेकर सुदूर अफगानिस्तान तक फैला हुआ था। धृतराष्ट्र की पत्नी गांधारी वहां के राजा सुबल की पुत्री थीं। गांधारी के भाई शकुनी दुर्योधन के मामा थे। गांधार जनपद के क्षेत्र वर्तमान में अफगानिस्तान और पाकिस्तान के कुछ मिलकर हैं। गांधार की राजधानी तक्षशिला थी। आज के पाकिस्तान का पश्चिमी तथा अफगानिस्तान का पूर्वी क्षेत्र उस काल में भारत का गंधार प्रदेश था। पुरुषपुर (आधुनिक पेशावर) तथा तक्षशिला इसकी राजधानी थी। ◾तक्षशिला तक्षशिला गांधार देश की राजधानी थी। इसे वर्तमान में रावलपिन्डी कहा जाता है। तक्षशिला को ज्ञान और शिक्षा की नगरी भी कहा जाता था। ◾कंबोज कंबोज भी अफगान, पाकिस्तान और कश्मीर के कुछ क्षेत्रों को मिलाकर था। इसकी राजधानी राजपुर थी जिसे वर्तमान में राजौरी कहते हैं। यह भारतीय कश्मीर में स्थित है। पाकिस्तान का हजारा जिला भी कंबोज के अंतर्गत ही था। आधुनिक मान्यता के अनुसार कश्मीर के राजौरी से तजाकिस्तान तक का हिस्सा कंबोज था जिसमें आज का पामीर का पठार और बदख्शां भी हैं। उल्लेखनीय है कि कंबोज और कंबुज में फर्क है। प्राचीन कंबुज को वर्तमान में कंबोडिया कहते हैं। ◾ महाभारत काल में इरान को पारस्य देश कहते थे जहां पर अस्वाका (Aswaka) का साम्राज्य था। ◾इराक में पहलावा (Pahlava) का साम्राज्य था। ◾उत्तर मद्र और उत्तर कुरु को वर्तमान में किर्गिस्तान (Kyrgistan) कहते हैं। ◾नेपाल में विदेही साम्राज्य था जिसकी राजधानी मिथिला थी। ◾श्रीलंका में सिंहल और त्रिकुटा नामक दो राज्य थे। ◾महाभारत काल के परम कंबोज (Parama Kamboja) और हारा हूण (Hara Huna) वर्तमान में ताजाकिस्तान (Tajakistan) के अंतर्गत आते हैं। ◾तिब्बत को त्रिविष्टप कहा जाता था जहां रिशिका (Rishika) और तुशारा (Tushara) नामक राज्य थे। ◾ वंगा और पुण्ड्र के क्षेत्र को वर्तमान में बांग्लादेश कहा जाता है।ब्राह्मण नदी के उत्तर में उत्कल का देश था। पद्मा बेसिन में इसके उत्तर में "वंगा" का देश था, जो आज दक्षिणी बांग्लादेश का पद्मा डेल्टा है। ◾ म्यांमार ब्रह्मदेश था, जिसे बर्मा भी कहा जाता है। ◾ महाभारत काल में ग्रीस को यवन कहते थे। इसे वर्तमान में यूनान भी कहते हैं। कालयवन वहीं का था। इसी तरह सीरिया, असीरिया, सऊदी अरब, चीन आदि कई देशों का वर्णन मिलता है। महाभारत में सभा पर्व के दिग्विजय पर्व में युधिष्ठिर के राजसूय यज्ञ के बाद अर्जुन, भीम, नकुल और सहदेव द्वारा दिग्विजय यात्रा के दौरान विजित क्षेत्रों का काफी विस्तार से वर्णन किया गया है। इस पोस्ट में दिग्विजय का भौगौलिक मानचित्र भी साझा किया गया है।




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