भारतीय समाज में शादी का बड़ा महत्व है, खासकर लड़की की शादी को तो सामाजिक सम्मान के साथ जोड़कर देखा जाता है। यदि कोई लड़की की शादी किसी कारणवश नही करता या देर से करता है तो समाज उसे अच्छी दृष्टि से नही देखता। हमारे समाज में लड़कियों की शादी एक सामाजिक समस्या बन गई है। लड़की अगर पच्चीस पार कर जाए तो लोगों के मन में तरह तरह के सवाल उठने लगते है। समाज में लोग आपस में कानाफुशी करने लगते है। आस पड़ोस और मुहल्ले के लोगों को गपसप करने का एक अच्छा टॉपिक मिल जाता है। लोग न तो उस लड़की की मनोदशा समझते हैं, ना उसके घरवालों की मजबूरियां। उनका बस यही एक सवाल रहता है कि ये अपनी लड़की की शादी क्यों नहीं कर रहे? बड़ा आसान होता है लोगों के लिए कहना कि इस उम्र में कुंवारी है तो जरूर कोई बात होगी। अधिक उम्र की कुंवारी लड़की और लड़को का चरित्र हनन करने में समाज को बड़ा मजा आता है। बड़ी ही आसानी से लोग कह देते हैं कि 30 की उम्र में भी कुंवारी है तो अब कौन सी सती सावित्री बैठी होगी? और अगर लड़की नौकरी वाली हो तो लोगों को कहने का और भी मौका मिल जाता है कि घरवाले बेटी की कमाई खा रहे हैं।
हमारा समाज शादी के मामले में संकीर्ण मानसिकता से बंधा हुआ है। भारतीय समाज में अगर लड़की की शादी 18 से 25 के बीच हो गई तो ठीक नहीं तो सब बेकार ऐसा माना जाता है जो बिल्कुल निराधार और कोरा बकवास है। लड़की अगर बहुत काबिल है तो भी लोग बोल देते हैं कि क्या फायदा अगर शादी और बच्चे नहीं हैं, क्या करेगी इतना कमाकर जब अकेले ही रहना है?
अब जरा सोचिए। अगर 18 की उम्र में शादी करके 25 की उम्र में तलाक़ हो जाए तब क्या करेंगे ? अगर 21 की उम्र में शादी कर के भी सालों तक बच्चे न हों तब क्या करेंगे ? अगर 20 की उम्र में शादी करके भी लड़की यदि 22 के उम्र में विधवा हो जाए तब क्या करेंगे ? ऐसी भी लड़कियां होती हैं जो 18-20 की उम्र में शादी कर के 22-25 की उम्र में विधवा हो गई हैं। और इस बीच अगर मां बन गईं हैं तो बच्चों का वास्ता देकर पूरी उम्र उनकी दूसरी शादी नहीं की जाती। ऐसे भी उदाहरण देखने को मिलते हैं जब कम उम्र में शादी करने के चक्कर में अनसेटल्ड लड़का जो पढ़ ही रहा है से शादी कर देते हैं, और बाद में कुछ भी सेटल नहीं होता। इस समाज को थोड़ा समझने की और बदलने की बहुत ही ज्यादा जरूरत है।
शादी जीवन का हिस्सा है पूरा जीवन नहीं है। शादी से भी ज़रूरी काम होते हैं मानव जीवन में। और शादी अपनी मर्जी से अपने पसंद के व्यक्ति से हो तभी अच्छी होती है। सिर्फ समाज या परिवार की खुशी के लिए ऐसे ही किसी के साथ शादी के बंधन में बंध जाना सही नही है। शादी का मकसद दूसरों को खुश करना नही है,बल्कि स्वयं लड़का लड़की को खुश रहना है, क्योंकि समाज का क्या है, आएगा ,नाचेगा, खाना खायेगा, दो चार कमियां निकालेगा और चला जायेगा फिर निभाना लड़का लड़की को ही है। शादी के बाद होने वाली परेशानियों को कभी समाज ने नही सुलझाया है और न कभी सुलझाएगा, क्योंकि समाज को आपके परेशानियों से कोई मतलब नहीं हैं उसको केवल आपके शादी और भोज से मतलब है। इसलिए सतर्क और सावधान रहे समाज के चक्कर में न पड़े। अपनी स्थिति देखे अपनी औकात को देखे तब जाकर जो ठीक लगे वह करें । वह शादी जिसमें लड़का और लड़की दोनों खुश हों वही सबसे अच्छी शादी है, नहीं तो सब बर्बादी है, फिर चाहे वह शादी किसी भी उम्र में हो।



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