आज हम बात करेंगे कि कैसे खोडियार की जो भावनगर(गुजरात) सौराष्ट्र प्रांत के राजपरा गांव स्थित से खोडियार माता की
जानबाई (वर्तमान खोडियार माता)
भावनगर(गुजरात) सौराष्ट्र प्रांत
खोडीयार माताजी जाति के चरवाहे थे उनके पिता का नाम मामदिया और माता का नाम देवलबा था।
उनकी सात बहनें और एक भाई था।उनके नाम थे आवड जोगड़, तोगड़, बिजबाई, होल्बाई, संसाई, जानबाई (खोडियार मां) और भाई मरखियो।
खोडियार मां का वाहन मगरमच्छ है।
उनका जन्म लगभग 7वीं शताब्दी में महा सूद आठवीं के दिन हुआ था, इसलिए उस दिन खोडीयार जयंती मनाई जाती है।
--माँ का नाम खोडियार कैसे पड़ा? -
मेरखिया भाई को एक बार एक बहुत ही जहरीले सांप ने काट लिया था। यह जानने पर माता-पिता और सात बहनों की जान अटक गई। जहर से छुटकारा पाने का उपाय सोचने लगे।
इतने में में गांव के एक बूढ़े चिकित्सक ने उपाय दिखाया कि अगर सूरज उगने से पहले पाताल लोक से नागराज से अमृत का कुम्भ लाया जाए तो जान बच जाएगी।
यह सुनकर बहनों में सबसे छोटी जानबाई (खोडियार माता) कुम्भ को पाताल लोक से लेने चली गई। रास्ते में उसे कुंभ मिल गया। इससे चलना मुश्किल हो गया। उनकी बहन को इशारा मिला कि जानबाई की पैर चोट लगी हुई है?
समय पर पहुँचने के लिए जानबाई मां अब एक मगरमच्छ पर सवार हुई, जो उसका वाहन था।
जब जानबाई मां कुम्भ को पानी से बाहर निकालती थी तो पैर लड़खड़ाता था, इसलिए उसका नाम तब से खोडियार पड़ा और फिर लोग उसे जानबाई से खोडियार कहने लगे।



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