राजस्थान के ऐतिहासिक नगर सवाई माधोपुर से 10 कि. मी. दूर अरावली पर्वत श्रंखलाओं से युक्त रणथंभौर का किला

विषम आकृति वाली पर्वत श्रेणियों के मध्य अवस्थित है.
गिरी दुर्ग के उत्कृष्ट उदाहरण के रूप में विख्यात इस किले का निर्माण 8 वीं शताब्दी में चौहानों द्वारा करवाया गया था.
हम्मीर देव चौहान यहां के यशस्वी शासक हुए हैं, जिन्हें 1301 ईस्वी में दिल्ली के सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी के आक्रमण का सामना करना पड़ा था.एक रक्त रंजित संघर्ष के बाद हम्मीर देव चौहान को पराजित होना पड़ा था.उक्त स्थिति में हम्मीर देव चौहान की रानी रंग देवी ने अपनी पुत्री देवल के साथ जल समाधि ले ली थी, जो राजपूताना के इतिहास में जल जौहर के नाम से प्रसिद्ध है.
यहां इस तथ्य को रेखांकित करना प्रासंगिक होगा कि उक्त युद्ध हम्मीर देव चौहान द्वारा अलाउद्दीन खिलजी से प्रताड़ित महमांशाह को शरण देने के फलस्वरूप हुआ था, जो इस सत्यता को रेखांकित करता है कि हम्मीर देव चौहान ने शरणागत वत्सलता के आदर्श का निर्वाह करते हुए राज्यलक्ष्मी सहित अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया था, जो राजस्थान के इतिहास का एक स्वर्णिम पृष्ठ है.


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