श्री चतु : सम्प्रदाय वैष्णव सन्मार्ग दर्शन
ऋवेद वैष्णव बंधुओं आप की जाती सभी जातियों से सर्व श्रेष्ठ हैं उसके प्रणाम स्वरूप यह विवरण शोध संस्थान अहमदाबाद लेखक श्री मान आनन्दी लाल जी कीलावत द्वारा प्रात होने पर आप भगवान श्री विष्णु स्वरूप सभी वैष्णव को सेवा मे समर्पित हैं।
रमा पदध्मि रामानंदा ,विष्णु स्वामी त्रिपुरारी , निम्बारक सनकादिका , माधव गुरुमुखी चारी ।।
सुदर्शन से सनक भये , शंख सनन्दन जान । सनातन विष्णु गदा , सन्तक पदम पहचान ।।
1 धर्म - चतु : सम्प्रदाय सर्व श्रेष्ठ सनातन
2 जाती श्री वैष्णव , ब्राह्मण , स्वामी , बैरागी, पुजारी ।
3 उत्पती - भगवान श्री विष्णु से ।
4 उत्पति गुण - सत्वगुण ।
5 पुर्वज - ऋषि मुनि गन ।
6 उपासक - श्री विष्णु सागार रुप ।
7 आराध्य देव - श्री विष्णु जी , श्रीराम , श्री कृष्णा , हमुमान ।
8 भगत दासत्व आदर्श - श्री हनुमान
9 गुरु प्राथमिकता - श्री राम , श्री कृष्णा , श्री हनुमान
10 वैष्णव धर्म परम्परा - अनादि काल से ।
11 धर्म प्रचारक - चतुर्थ सम्प्रदायाचार्य जी
12 भेंट स्वीकार - गुरु पद व्यक्ति गत योग्यता ।
13 ब्राह्म रुप लक्ष्य - 10
14 वैष्णव संत गुरू - 27
15 द्वारा पीठ - 52 द्वारा चार्य ।
16 गोत्र - ऋषि गोत्र , द्वारा गोत्र ।
17 तिलक - ऊर्ध्व पुण्डू , हरि मंदिर ,बीज,भाल ।
18 अर्पण दान - जीवदया , गोकुकर , कन्या दान ।
19 स्थान - अर्थ वस्त्र युक्त ।
20 भोजन - एकाकी , सात्विक , संध्या पुर्व
21 शयन - वसुंधरा तल ।
22 सूत्र जनेऊ - 6 धागे ।
23 गृहस्थल वस्त्र - स्वेत सूतीइ , स्वच्छ ।
24 खाध निषेध - मादक पदार्थ , अमिश भोजन ।
25 अभिवादन - जय सियाराम , जय श्री कृष्णा ।
26 प्रणाम - साष्टांडृ दंडवत प्रणाम
27 भगवतृ प्रसाद - पंचामृत , चरणामृत , तुलसी पत्र ।
28 आंतरिक लक्षण - वाणी प्रियता , सत्य सद्व्यवहार ।
29 भजन - श्री हरि भजन ।
30 भक्ति - साध्य , साकार, निष्काम भक्ति ।
31 जयंतियां - श्री राम, श्री कृष्ण , श्री हनुमान , आचार्य जन ।
32 नित्य किया ग्रहस्री - पंच महायज्ञ , ज्ञान ध्यान , षट्कर्म ।
33 प्रभु स्मरण - 6 बार प्रति दिन ।
34 मन: स्तुति - तेरा तुझको अर्पण
35 प्रभु मिलन - श्री विष्णु , श्री राम , श्री हनुमान , वैकुंठ ।
36 दान निषेध - सूतक , मृतक ।
37 षटाक्षर मंत्र - राम रामाय नमः , श्री कृष्णाय नमः , गोविन्दाय नमः , गोपालाय नमः ।
38 अर्चना अष्टयाम , पंचयाम , द्वियाम , धूप , दीप ।
39 व्रतोपवास - एकादशी , मंडृलवार , वैष्णवीय पर्व ।
40 वैष्णवीय दीक्षा ग्रहण - द्वारा पीठाचार्य पर्व ।
41 नाम उच्चारण - स्वगोत्र सहित नाम ।
42 स्वध्ययन - वेद , गीता , भागवतृ , रामायण , स्वग्रंथ ।
43 पुजा उपचार - षोडशोपचार , दशोपचार , पंचोपचार ।
44 शिक्षा - गोक्षर प्रणाम ।
45 मुक्ति रूप सामीप्य , सारूप्य , सायुज्य , सालोक्य ।
46 गति - ऊर्ध्व गति ।
47 मुक्ति धाम - वैकुंठ धाम , साचेत , गोलोक ।
48 प्राण निष्कासश - ब्रह्मरध दसवां द्वार ।
49 अंतिम देह यात्रा - काष्ठ संस्कार ।
50 अंतिम संस्कार - अग्नि संस्कार ।51पंचत्व स्थल - मुक्ति धाम ।
52 स्वगोपरान्त दिवस 17 दिन ।
वैष्णव के लिए - राम गायत्री
दासरथाय विद्महे सीता वल्लभाय धीमहि तन्नो राम: प्रचोदयात् ।।



No comments:
Post a Comment