Subscribe Us

Breaking

Tuesday, July 12, 2022

Neem


दोस्तों आज हम बात करेंगे नीम के पेड़ की। जो भारत में शायद ही कोई नीम के पेड़ से अनजान हो। भारत के हर खेत खल्यान में  लगभग कहीं न कहीं नीम का पेड़ मिलेगा ।                                                                                  
दोस्तों नीम एक ऐसा पेड़ है जिसके पत्ते के फल से  और उसकी पतली शाखाएं टूथपेस्ट के रूप में भी काम आती हैं। आज अमेरिका जैसे विकसित देशों में नीम की टूथपिक एक डॉलर में बिकती है।  सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह हे की  निम् को  बहुत अधिक संवारने की जरूरत है क्योंकि यह बहुत फायदेमंद हो सकता है। ज्यादातर खेतों में, यह खेत की लकीरों पर अनायास उगता है। नीम की छाया ठंडी और शीतल  होती है। नहाने में  निम् के साबुन इस्तेमाल किया जाए तो कई  तरह की त्वचा रोगों में कारगर होता हे 
लेकिन आज नीम खेत से गायब हो रहा है। किसान मित्रों, आप एक अनमोल पेड़ को अपने फायदे के लिए नजीवी  कीमत पर बेच रहे हैं। नीम भी उन कुछ पेड़ों में से एक है जिन्हें शास्त्रों में ऋषि माना जाता है। आपको काटने की जरूरत नहीं है नीम के पेड़ की  देखभाल करना  हमारा कर्तव्य है ताकि  हमारी आने वाली पीढ़ी इस अनमोल पेड़ से वंचित न रहे।

एंटी बायोटिक तत्वों से भरपूर निम् को सर्वोच्च औसधि की रूप में  हे. इसका स्वाद भले कड़वा हो लेकिन इससे होने वाले लाभ अमृत  हे। वैसे तो निम्  के पास आपकी हर एक समस्या इलाज हे। लेकिन आइये जान लेते हे निम् के ओसधीय गुण।                                                                                                                                                                                                                                                                                                                बिच्छू ततैये जैसे विषैले कीटो द्वारा काट लेने पर निम् के पत्तो को  महीन पीस कर काटे हुए स्थान पर लेप करने से राहत मिलती हे और जहर  नहीं फैलता                                                                                                          किसी भी प्रकार घाव हो जाने पर भी निम् के पत्तो  का लेप लगाने से राहत मिलती हे। इसके अलावा जैतून के तेल के साथ निम् के पत्तो का पेस्ट बनाकर लगाने से नासूर भी ठीक  हे                                                                                                                                                                                                                                     दाद या खुजली की समस्या होनेपर निम् के पतों को दही के साथ पीसकर लगाने पर काफी जल्दी लाभ  हे दाद की समस्या समाप्त हो जाती हे                                                                                                                         गुर्दे में पथरी होने की  स्थिति में  पत्तो की राख को २ ग्राम मात्रा में प्रतिदिन पानी  साथ लेने से पथरी गलने लगती हे और मूत्र मार्ग से बहार निकल जाती हे                                                                                                            मेलिरिया होने की स्थिति में निम् की छाल को उबालकर उसका काढ़ा बनाले अब ये काढ़ा को दिन में तीन बार बड़े चम्मच भरकर पिने से बुखार में राहत हे और कमजोरी भी ठीक  है।                                                             त्वचा रोग होने पर निम् का तेल बहोत लाभकारी होता है। निम् के तेल में  थोड़ा सा कपूर मिलाकर त्वचा में मालिस करने से त्वचा रोग ठीक हो जाता है।  निम् के डंठल में ,खांसी ,बवासीर ,प्रमेह और पेट में होने वाले कीड़े को ख़त्म करने  के गुण होते है। इसे प्रतिदिन चबाने से यतो उबालकर पिने से फायदा है।                                                                                                                                                                                                         सिरदर्द ,दांतदर्द ,हाथ पैर दर्द ,और सीने में दर्द होने की समस्या में निम् के तेल की मालिस बहुत लाभकारी  है इसके फल  का उपयोग  कृमिनाशक और कफ में उपयोग  जाता हे                                                                      कुल मिलाके निम् का पेड़ मनुष्य जीवन में आशीर्वाद रूप में है।                                                                                                                                             

No comments:

Post a Comment